Politics of signals from the platform of faith

दुर्ग–भिलाई।
छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में बड़े धार्मिक आयोजनों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है। रायपुर से लेकर भिलाई तक, कथाओं, प्रवचनों और भव्य धार्मिक कार्यक्रमों में भारी भीड़ देखी जा रही है। इन आयोजनों को लेकर अब सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं।

🔎 आयोजन का उद्देश्य: आस्था या प्रभाव?

भिलाई में हाल ही में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम, जिसके आयोजक Rakesh Pandey रहे, को लेकर चर्चा तेज़ है।
कार्यक्रम में देशभर में चर्चित कथावाचक Dhirendra Krishna Shastri की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए कुछ बयानों और आयोजक से जुड़े संबंधों के ज़िक्र के बाद यह बहस शुरू हो गई कि:

❓ क्या ऐसे आयोजन सिर्फ़ धार्मिक हैं या इसके पीछे सामाजिक-राजनीतिक संदेश भी छिपा है?

🧠 क्या है “Indirect Political Messaging”?

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, जब:

मंच से सीधे किसी पार्टी या नेता का नाम न लिया जाए

लेकिन आयोजक, रिश्ते और मंच की भाषा से संकेत दिए जाएँ

तो इसे Indirect Political Messaging कहा जाता है।

इस तरह के आयोजनों में:

बड़ी संख्या में आम लोग जुटते हैं

राजनीतिक पहचान बिना प्रचार के बनती है

और आयोजक की सामाजिक पकड़ मज़बूत होती है

🌾 छत्तीसगढ़ महतारी और स्थानीय सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की पहचान:

सादगी

आपसी भाईचारे

और ज़मीनी मुद्दों (रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य) से जुड़ी है

ऐसे में सवाल उठता है कि:

क्या इन आयोजनों से स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिल रहा है?

क्या स्थानीय कलाकारों और संस्कृति को मंच मिल रहा है?

या फिर यह सिर्फ़ भीड़ और भावनाओं तक सीमित रह जाता है?

🗣️ जनता क्या कहती है?

कुछ लोगों का मानना है कि:

“धर्म जोड़ने का काम करता है, राजनीति नहीं।”

वहीं कुछ नागरिकों का कहना है:

“जब धर्म मंच से रिश्ते और ताक़त दिखाई जाती है,
तो सवाल उठना स्वाभाविक है।”

⚖️ DurgTimes की संपादकीय टिप्पणी

DurgTimes का मानना है कि:

धर्म का सम्मान ज़रूरी है

लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछना भी उतना ही ज़रूरी है

आस्था और राजनीति के बीच की रेखा स्पष्ट रहनी चाहिए

निर्णय जनता का है, लेकिन जानकारी पूरी होनी चाहिए।

📌 यह रिपोर्ट केवल तथ्यों और सार्वजनिक चर्चाओं पर आधारित है।
📌 किसी भी व्यक्ति, संस्था या धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने का उद्देश्य नहीं।

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